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The Nehru Memorial Museum & Library

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‘Rail Karmiyon ki Samasyaon ka Badalta Swarup’, 16th September, 2014

सार:

इस शोध पत्र का उद्देश्य रेल के संचालन करने वाले रेलकर्मियों की समस्याओं व उनके सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन है। वर्तमान समय में रेल सेवा परिवर्तन के मोड पर आ खड़ी है। इस शोध पत्र में सर्व प्रथम रेलकर्मियों की समस्याओं में आ रहे बदलाव को प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके पश्चात समस्याओं के बदलते स्वरूप के कारण उनके सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है। शोध पत्र में समस्याओं के उत्पत्ति के मुख्य कारण, तुलनात्मक अभाव बोध, सामाजिक विकास व कल्याणकारी कार्यों का अवरूद्ध होना, अकुशल व गैर दक्ष कार्यों में उच्च शिक्षित वर्ग का प्रवेश, निजीकरण का दुष्प्रभाव, नई पेंशन योजना का लागू होना तथा नक्सलवाद के जोखिम को रेखांकित किया गया है। अंत में यह शोध पत्र निम्नवत महत्वपूर्ण निष्कर्षों तक पहुँचता है।
 रेलकर्मियों के सामाजिक सहयोग में आ रही कमी।
 रेलकर्मियों पर अतिरिक्त कार्य बोझ पड़ना।
 नक्सलवाद एवं आतंकवादी घटनाओं से रेलकर्मी के जीवन व सुरक्षा पर बढ़ता खतरा।
 वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा का अभाव।
 रेलकर्मी परिवार की महिलाओं के आर्थिक विकास का अवरूद्ध होना।.

परिचय:

डाॅ. प्रदीप शर्मा ने बनारस हिंदु विश्वविद्यालय से सन् 1976 में समाजशास्त्र में पीएचडी की। इनके शोध का विषय था ‘माइग्रेंट्स इन कोलकाता फ्राॅम इस्टर्न यू. पी. ऐण्ड बिहार’। भारतीय रेल में सेवारत्त होने के अतिरिक्त वे टेªड यूनियन के सक्रिय कार्यकर्ता है। 2004 से 2009 तक वे लखनऊ मंडल के नार्दन रेलवे मेन्स यूनियन के मंडलीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इन्होंने संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं में विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए है तथा ‘इमीग्रेशन ऐण्ड सोशल चेंज’ नामक पुस्तक भी प्रकाशित की है। सक्रियतावादी होने के साथ हिंद मजदूर सभा, यू. पी. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी हैं।

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