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‘Hamare Swasthya aur Sarvajanik Nitiyon ke beech ki Adrishya Kadiyan’ , 12th January, 2015.

on

‘Hamare Swasthya aur Sarvajanik Nitiyon ke beech ki Adrishya Kadiyan’

by

Mr. Dinesh C. Sharma,
Journalist and Author,
New Delhi.

सार:

यह आम धारणा है कि अपने स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होता है। यह धारणा जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के लिए विशेष रूप से सही मानी जाती रही है। वास्तविकता यह है कि स्वास्थ्य के प्रति वैयक्तिक जिम्मेदारी का असर तभी होता है जब सभी नागरिकों को एक स्वास्थ्यकारी जीवन जीने का पूरा मौका मिले और लोक नीतियां स्वास्थ्यकारी हो। भारत में हृदय रोग और जीवन शैली से जुडे़ अन्य रोगों को बढ़ते प्रकोप के लिए निश्चित रूप से हमारी बदलती जीवन शैली की मुख्य भूमिका है। हृदय रोग के लिए मुख्य रिस्क फैक्टर्स में चीनी, नमक और वसा से युक्त जंक फूड का सेवन, तम्बाकू उत्पादों का अधिक सेवन और शारीरिक श्रम में लगातार हो रही कमी को माना जाता है। डाॅक्टरों और स्वास्थ्य से जुडे़ सभी विशेषज्ञों का मानना है कि सभी को इन रिस्क फैक्टर्स को कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए, यानि जिम्मेदारी नागरिकों की ही है। लेकिन इस बात को अनदेखा किया जा रहा है कि रिस्क फैक्टर्स के बढ़ने के पीछे हमारी लोक नीतियों का भी हाथ है। गलत नीतियों के चलते हृदय रोग रिस्क फैक्टर्स को परोक्ष और अपरोक्ष रुप में सरकारी सब्सिडी और राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। कहीं न कहीं हमारी लोक नीतियां हृदय रोग को बढ़ावा दे रही हैं।

परिचय:

श्री दिनेश सी. शर्मा एक पत्रकार एवं लेखक हैं जिन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधित मुद्दों पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के लिए रिपोर्टिंग का तीस वर्षों का अनुभव है। इन्हें 2007 में न्यू इंडिया फेलोशिप प्रदान की गई जिसके अंतर्गत इन्होंने भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के समग्र इतिहास पर ‘द लाॅन्ग रेवोलुशन’ नाम से पुस्तक लिखी। 2009 में प्रकाशित इस पुस्तक का अंतर्राष्ट्रीय संस्करण अगले साल एम. आई. टी. प्रेस द्वारा प्रकाशित होगा। हाल ही में ‘नो योर हार्ट’ नाम से इनकी दूसरी पुस्तक प्रकाशित हुई है।

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