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The Nehru Memorial Museum & Library

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‘Barh se Anukulan ki Paramparayein: Ek prarambhik vishleshan’, 2ndMarch, 2015 .

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‘Barh se Anukulan ki Paramparayein:
Ek prarambhik vishleshan’

by

Dr. Praveen Singh,
Ambedkar University,
Delhi.

सार:

उत्तर भारत के समतल मैदान बाढ़ प्रभावित हैं और इस कारण से इस क्षेत्र में मानव विकास सूचकांक भी काफी कम हैं। इस क्षेत्र की अधिकतर जनसंख्या ऐतिहासिक रुप से हाशिए पर रही है और अन्य प्रकार के जोखिम का सामना करती रही हैं। राज्य ने इस क्षेत्र में आपदाओं से निपटने तथा विकास के लिए औपनिवेशिक तथा उत्तर औपनिवेशिक काल में कई प्रयास किए, परंतु इन प्रयासों का समतल क्षेत्रों पर नकारात्मक एवं विपरीत प्रभाव हुआ। इस क्षेत्र के लोगों ने स्वतः कई अनुकूलन प्रथाओं द्वारा इन विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। इस व्याख्यान में, मैं कुछ अनुकूलन प्रथाओं का उल्लेख करते हुए यह तर्क प्रस्तुत करने का प्रयास करुंगा कि इन प्रथाओं का उचित अध्ययन कर वर्तमान तथा भविष्य के भौगोलिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों का सामना करने के लिए व्यापक अनुकूलन रुपरेखा तैयार की जा सकती है। मैं, इस प्रपत्र के अंतर्गत उन स्थानिक कारण का भी विश्लेषण करुंगा जो अनुकूलन को प्रभावित करती हैं।

परिचय:

डाॅ. प्रवीण सिंह एक इतिहासकार है और अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली के मानव परिस्थितिकीय केन्द्र में अध्यापन करते हैं। आपका कार्य मुख्यतः पूर्वी भारत के जल संधाधनों के इतिहास पर केन्द्रित हैं।

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