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The Nehru Memorial Museum & Library

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' Parmanu Urja: Bharat ki Urja Atmanirbharta mein Nabhikiya Urja Ki Bhumika', 13th April, 2015.

' Parmanu Urja:
Bharat ki Urja Atmanirbharta mein Nabhikiya Urja Ki Bhumika'

by

Mr. S. K. Malhotra
Deptt. of Atomic Energy, Mumbai.

सार :

ऊर्जा मानव के विकास का मूल प्रेरक तत्व है। कुल राष्ट्रीय उत्पाद तथा औसत अपेक्षित आयु का प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत से सीधा संबंध है। औद्योगिक उत्पाद, परिवहन, संचार, कृषि, शिक्षा तथा स्वास्थ्य संरक्षण आदि के लिए ऊर्जा एक महत्वपूर्ण अव्यव होने के कारण किसी भी राष्ट्र के वास्तविक विकास के लिए मूलत: आवश्यक है। भारत की तीन चौथाई जनता गांवों में रहती है और कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अब भी गरीबी की रेखा के नीचे है। हमारी ऊर्जा नीति ऐसी होनी चाहिए कि इन करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा कर उन्हें सामाजिक व आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सके।
भारत कुल विद्युत उत्पादन के मामले में विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान तथा रूस के बाद पांचवें स्थान पर आता है। परंतु यदि हम प्रति व्यक्ति बिजली की खपत के आंकड़े देखे तो भारत का स्थान विश्व में बहुत नीचे चला जाता है। हमारे देश में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष विद्युत उत्पादन की मात्रा लगभग 800 kWh है जो विश्व औसत (लगभग 3000 kWh) की तुलना में एक चौथाई तथा विकसित देशों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत है। यदि देश को हमें विकास के पथ पर और आगे बढ़ते देखना है तो हमें अपने विद्युत उत्पादन में कई गुना वृद्धि करनी होगी। इक्कीसवीं सदी के मध्य तक भारत में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष विद्युत खपत को 5000 kWh तक पहुंचाना हमारा ध्येय हैं। इसके लिए हमें देश में कुल स्थापित विद्युत क्षमता को लगभग 8-10 गुना करना होगा जो अपने आप में एक भागीरथ प्रयास होगा।
नाभिकीय ऊर्जा एक ऐसा प्राथमिक ऊर्जा स्रोत है जिसमें विकास की अत्यधिक संभावना है और यह ग्रीन हाउस गैस प्रभाव मुक्त है। अत: भारत से संबंधित किसी भी ऊर्जा नीति में नाभिकीय ऊर्जा का अपना एक विशिष्ट स्थान है। यद्यपि हमारे यूरेनियम के ज्ञात स्रोत काफी कम है परंतु देश में थोरियम के प्रचुर भंडार हैं। भारत का त्रिचरणीय नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम इसी तथ्य पर आधारित है। प्रथम चरण के अंतर्गत स्वदेशी दाबित भारी पानी रिएक्टर आते हैं जिनमें प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में तथा भारी पानी को मंदक व शीतलक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। द्वितीय चरण के अंतर्गत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर आते है जिसमें प्लूटोनियम का ईंधन के रूप में उपयोग होता है। यह प्लूटोनियम प्रथम चरण के रिएक्टरों की भुक्तशेष ईंधन के पुनर्संसाधन से प्राप्त होता है। इन रिएक्टरों की विशेषता यह है कि इनमें जितना ईंधन खर्च होता है उससे अधिक का उत्पादन होता है। साथ ही प्लूटोनियम के विखण्डन में उच्च न्यूट्रॉन ईल्ड तथा न्यूट्रानों की उच्च ऊर्जा के कारण इनमें थोरियम का यूरेनियम-233 में परिवर्तन संभव होता है। तृतीय चरण थोरियम-यूरेनियम 233 चक्र पर आधारित है। पिछले कई वर्षों के निरंतर प्रयास के फलस्वरूप भारत में संपूर्ण थोरियम ईंधन चक्र का समुचित अनुभव है।
नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में ईंधन की वर्तमान में उपलब्ध मात्रा के आधार पर अपेक्षित विकास दर रखना असंभव होगा। अत: समय की मांग है कि एक निर्धारित समय के लिए ईंधन व रिएक्टरों का आयात कर अतिरिक्त नाभिकीय विद्युत क्षमता स्थापित की जाए।
नाभिकीय ऊर्जा को लेकर जनमानस में कुछ अवधारणाएं एवं भ्रांतियाँ हैं। इन भ्रांतियों के उन्मूलन के बिना देश में नाभिकीय ऊर्जा का वांछित विकास असंभव है। अत: इस दिशा में एक व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है ताकि हमारे वैज्ञानिकों व अभियंताओं द्वारा किए जा रहे विकास कार्य का लाभ समस्त देशवासियों तक पहुँच सके।

परिचय:

श्री स्वप्नेश कुमार मल्होत्रा, सन् 1976 में आगरा विश्वअविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर अध्ययन के पश्चात् भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में बतौर वैज्ञानिक अधिकारी नियुक्त हुए । दो दशक से भी अधिक अवधि तक वे भारी पानी पर अनुसंधान एवं विकास कार्य में रत् रहे । भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम के लिए भारी पानी आवश्यक महत्वपूर्ण नाभिकीय सामग्री है । अब तक उनके 35 अनुसंधान पेपर प्रकाशित हुए हैं।
सन् 1999 से वे परमाणु ऊर्जा विभाग के जनजागरूकता प्रभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत् हैं । आम जनता के दिलो-दिमाग से परमाणु ऊर्जा के बारे में मिथक एवं भ्रांतियाँ मिटाने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों के प्रति लोगों में जागरूकता बढाने के उद्देश्य से विभाग के संपूर्ण कार्यक्रम की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन के लिए श्री मल्होत्रा उत्तरदायी हैं । इन्होंने देश विदेश का भ्रमण किया है तथा विविध वैज्ञानिक विषयों पर 400 से भी अधिक आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किए हैं ।
वर्ष 2007 में श्री मल्होत्रा को नाभिकीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा "विशेष पुरस्कार" से सम्मानित किया गया । वर्ष 2010 में नेशनल ऐसोसिएशन फॉर ऐप्लीकेशन्स ऑफ रेडियोआइसोटोप्स एन्ड रेडियेशन इन इन्डस्ट्री द्वारा श्री मल्होत्रा को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सराहना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इन्डियन न्यूक्लियर सोसाइटी द्वारा वर्ष 2009 के लिए उन्हें INS साइंस कम्यूनिकेशन पुरस्कार से अलंकृत किया गया । इंडियन सोसाइटी ऑफ ऐनेलिटिकल साइंटिस्ट्स द्वारा उन्हें वर्ष 2011 के लिए आई. एस. ए. एस. नेशनल अवार्ड फॉर ऐक्सेलेन्स इन साइंस एण्ड टैक्नोलॉजी प्रदान किया गया । हाल ही में (फरवरी, 2015) उन्हें पूर्णवाद इंस्टीट्यूट फॉर लाइफ इंजीनियरिंग द्वारा डॉ. आर. डी. परनेकर प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे इंडियन साइंस राइटर्स ऐसोसिएशन के फेलो हैं।

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