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The Nehru Memorial Museum & Library

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‘Jantar Mantar Vedhshalayein: Kuchh aankron ka ahsaas’, 22nd April, 2015 .

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‘Jantar Mantar Vedhshalayein:
Kuchh aankron ka ahsaas’

by

Dr. N. Rathnasree,
Nehru Planetarium,
NMML.

सार:

18वीं शताब्दी के शुरूआत में बनी पांच जंतर मंतर वेधशालाओं में से चार आज भी मौजूद है-दिल्ली, जयपुर, उज्जैन और वाराणसी की वेधशालाएं। आमतौर से ये ऐतिहासिक इमारतें मानी जाती है, और आते जाते लोगों को कुछ जानकारी होती है कि इनमें कुछ धूप घडि़यां है। लेकिन यह वेधशालाएं सूक्ष्मता से खगोलीय आंकड़ें लेने के लिए बनाई गयी थी। इन्हें बनाने वाले राजा जयसिंह का मकसद था कि आम जनता आसानी से ऐसे आंकडे़ ले सके और आज भी यहां आने वाले लोग इन यंत्रों का इस्तेमाल करके मजे से खगोलीय आंकडे़ ले सकते है। यह सब जानकारी उचित ढंग से जनसामान्य तक नहीं पहुंच सकी। हां, इन सभी जंतर मंतर वेधशालाओं के यंत्रों से हम और आप आसानी से खगोलीय आंकडे़ ले सकते है। साथ ही साथ इन आंकड़ों के वैज्ञानिक पहलू भी समझ सकते हैं। कुछ इकट्ठे किए हुए आंकडे़ और उन्हें पाने के तरीके के साथ-साथ इन यंत्रों की खासियत की चर्चा इस वार्ता में की जाएगी।

परिचय:

डॉ. रत्नाश्री वर्तमान में नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में तारामण्डल निदेशिका है। खगोल विज्ञान और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में आपकी गहरी रूचि हैं। खगोल विज्ञान संबंधी अनुसंधान और अन्वेषणों को इतिहास के सापेक्ष अध्ययन में आप सतत् कार्यरत है। खगोल विज्ञान के साथ सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य का गहरा संबंध है। दिल्ली, जयपुर, उज्जैन और वाराणसी के ऐतिहासिक जंतर मंतर वेधाशालाओं को खगोल विज्ञान के शिक्षण हेतु प्रयोगशाला के रूप में देखा जाता है। इन वेधशालाओं के उपयोगिता को सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में कई वैज्ञानिक पहलुओं पर आप कार्य कर रहीं है।

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