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The Nehru Memorial Museum & Library

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‘Neitik Tendua: Devatva aur prakriti ki batchit’, 13th May, 2015 .

on
‘Neitik Tendua: Devatva aur prakriti ki batchit’

by
Dr. Dr. Sunetro Ghosal,
Stawa, Leh-Ladakh.

सार:

हम आमतौर से तेंदुए को खतरनाक मांसाहारी और आदमखोर के रूप में देखते है। शायद तंेदुए भी हमें इसी नज़र से देखते है। तेंदुआ एक होशियार प्राणी है। आज वैज्ञानिक बताते है कि तेंदुए इंसानों की तरह अपने आसपास के बारे में जानने की क्षमता रखते है। भारत में कई समाज को तेंदुए के यह पहचान कई सदियों से रही है। यह लोग मानते है कि तेंदुए को नैतिकता की समझ है। इन लोगों का तेंदुए के साथ लम्बा ऐतिहासिक, नैतिक और सामाजिक संबंध है। इन संबंधो के कारण तेंदुए और लोग Conflict बिना रह पाते है। इससे वैज्ञानिक, प्रबंधकगण और समाज विकास योजना और पर्यावरण संरक्षण के बारे बहुत कुछ सीख सकते है।

परिचय:

डॉ . सुनेत्रो घोषाल, मनुष्य और जंगली जानवरों के संबंधो की जांच करते हैं। आपने तेंदुए, हिम तेंदुआ, भेडि़या और पक्षियों पर अध्ययन किया है। डॉ . घोषाल, सेट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई और नार्वजियन युनिवर्सिटी ऑफ़ लाइफ साइंसेज में पर्यावरण, विकास और विज्ञान पढ़ाते है। वह इन विषयों पर विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए नियमित रूप से लिखते है। डॉ . घोषाल, अब ‘स्टावा’ और ‘लद्दाख स्टडीज़’ पत्रिका के संपादक है।

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