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अभिलेखागार

नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय के अभिलेखागार की स्थापना 1964 में जवाहरलाल नेहरु के पारिवारिक कागज़ातों के संग्रह से हुई थी। इसमें फिलहाल देश-विदेश से प्राप्त विभिन्न संस्थागत रिकार्ड और प्रतिष्ठित नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों, राजनीतिज्ञों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, न्यायकर्ताओं तथा उद्योगपतियों के हज़ार से भी अधिक संग्रह मौजूद हैं जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान दिया। नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में निजी कागज़ातों के संग्रह में - एम. के. गांधी, सी. राजगोपालाचारी, बी. सी. रॉय, जयप्रकाश नारायण, चरण सिंह, सरोजनी नायडू और राजकुमारी अमृत कौर के कागज़ात शामिल हैं। संस्थागत कागज़ातों में अखिल भारतीय कांगे्रस समिति, अखिल भारतीय हिंदू महासभा, अखिल भारतीय व्यापार संघ कांग्रेस, इंडियन मर्चेंट्स चैंबर तथा डी. ए. वी. कॉलेज ट्रस्ट एवं प्रबंधन सोसाइटी के कागज़ात शामिल हैं। अभिलेखागार के अन्य रिकार्ड में हस्तलिखित दस्तावेज़ों, टंकित दस्तावेज़ों, प्रेस कतरनें व मुद्रित सामग्री के अतिरिक्त मूल पत्र, लेख, भाषण, टिप्पणियां तथा संस्मरण व डायरियां शामिल हैं।

अभिलेखागारीय सामग्री में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विशेष संदर्भ में, भारत के सामाजिक और राजनैतिक विकास से संबंधित मौखिक इतिहास साक्षात्कार के 838 प्रतिलेख भी हैं। इनमें ख़ान अब्दुल गफ्फार ख़ान, टी. टी. कृष्णामाचारी, जे. बी. कृपलानी, कमला देवी चट्टोपाध्याय, के. एन. काटजू, एच. वी. कामथ, आई. के. गुजराल व ज्योति बसु जैसे कुछ महत्वपूर्ण साक्षात्कारों के प्रतिलेख भी शामिल हैं। आधुनिक भारतीय इतिहास के क्षेत्र में ऐतिहासिक अध्ययन के लिए यह अभिलेखागार प्राथमिक और गैर-सरकारी स्रोत सामग्री का सबसे बड़ा भंडार है। ज्ञान के इस भण्डार का परिरक्षण सुनिश्चित करने के लिए, नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय ने हाल ही में डिजिटलीकरण का बीड़ा उठाया है। इससे जो शोधार्थी शोध हेतु एनएमएमएल अभिलेखागार का उपयोग करना चाहते हैं उनके लिए यह सरलता से उपलब्ध होगी। नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय के अभिलेखागार के डिजिटलीकरण का मुख्य उद्देश्य यह है कि दुर्लभ दस्तावेज़ों को परिरक्षित किया जा सके एवं संस्था के कार्मिकों, पुस्तकालय के सदस्यों और विद्वानों को यह अधिक सुलभ हो, खोज की प्रकृति को बढ़ावा मिले तथा इंटरनेट पर डिजिटलीकृत सूचना उपलब्ध हो सके।

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