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Museum

संग्रहालय

तीन मूर्ति भवन में संग्रहालय का विकास मुख्यतः एक व्यक्तिपरक संग्रहालय के रूप में किया गया है। इसमें जवाहरलाल नेहरु के शयन कक्ष, बैठक और अध्ययन कक्ष को उसी रूप में परिरक्षित रखा गया है जैसे वे उनके निधन के समय में थे।

इस संग्रहालय में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता, आधुनिक भारत के निर्माता, विश्वशांति के दूत, जवाहरलाल नेहरु जैसे ओजस्वी व्यक्ति के जीवन एवं कार्यों को दृश्यमाध्यम के जरिए दर्शाया गया है।

जवाहरलाल नेहरु द्वारा भारतीय संविधान सभा में 14 एवं 15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को दिए गए ऐतिहासिक भाषण ‘नियति से मिलन’ (Tryst With Destiny)’ के अंश एक विशाल ग्रेनाइट शिला पर अंकित किए गए हैं जो संग्रहालय के सामने के लॉन में स्थापित है। अंग्रेज़ी और हिंदी में ‘वसीयतनामा (Will and Testament) ‘ एक वसीयत से कहीं अधिक है, यह भारत और उसकी जनता के प्रति उनके अगाध प्रेम का साक्ष्य है।

संग्रहालय में जवाहरलाल के जीवन और कार्यों से संबंधित प्रदर्शनियों की एक श्रृंखला है जो भारत के राजनैतिक स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि में समकालीन तस्वीरों, पांडुलिपियों की फोटोप्रतियां, पत्रों, प्रेस कतरनों, पत्रिकाओं और अन्य दस्तावेज़ों से भरपूर है। इन प्रदर्शनियों में दर्शायी गई महत्वपूर्ण घटनाओं में - पश्चिम के प्रति भारत की प्रतिक्रिया, 1857 का विद्रोह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्पत्ति, होमरूल मूवमेंट, गांधी का उदय, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, पाकिस्तान की मांग, क्रिप्स मिशन, भारत छोड़ो आंदोलन, इंडियन नेशनल आर्मी का गठन, कैबिनेट मिशन, 1947 में भारत की आज़ादी और विभाजन तथा संविधान निर्माण की प्रक्रिया मुख्य हैं।

संग्रहालय का अन्य आकर्षण इसकी उपहार गैलरी है जिसमें देश और विदेश के दौरों के दौरान नेहरुजी को मिले उपहार प्रदर्शित हैं। इसके अतिरिक्त, नेहरु के जीवन और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न चरणों के विविध पहलुओं को दर्शाने के लिए समय-समय पर विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया जाता है।

संग्रहालय के पुराने बिक्री पटल को नवीन भेंट स्मारिका काउंटर में परिवर्तित कर दिया गया है। यह तीन मूर्ति भवन के भूतल पर है और इसमें पुस्तकें, तस्वीरें, नेहरु के चुनिंदा भाषणों के श्रव्य कैसेट्स आदि उपलब्ध हैं।

इसके परिसर में एक संरक्षित स्मारक,‘कुशक महल’ भी है। फिरोज़शाह तुगलक के शासनकाल (सन् 1351-88) में इसका प्रयोग शिकारगाह के रूप में होता था।

नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय प्रातः 9.00 से सायं 5.30 बजे तक, सोमवार को छोड़कर सभी दिन खुला रहता है। दर्शकों को संग्रहालय घुमाने के लिए गाईडों की निःशुल्क सेवा उपलब्ध है। यहाँ स्वतंत्रता आंदोलन की कहानी के साथ उभरते हुए भारत की तस्वीर देखने प्रतिदिन औसतन दस हजार दर्शक आते हैं।

भारत के अलग-अलग भागों और समाज के अलग-अलग वर्गों से अब तक हज़ारों की संख्या में इसके प्रशंसक, अंतर्राष्ट्रीय हस्तियां और पर्यटक इसके उद्यान और इसकी गैलरी को देखने आ चुके हैं।

यह अत्यंत गर्व की बात है कि जवाहरलाल नेहरु के निधन के चार दशक बाद भी इस संग्रहालय ने अपनी लोकप्रियता बनाए रखी है।

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