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युवा शोधार्थी कार्यशाला 2017 (जून)

उपनिवेशवाद : अर्थव्यवस्था, राज्य और समाज

जून, 2017 में नेहरू स्‍मारक संग्रहालय एवं पुस्‍तकालय एक सप्‍ताह की अवधि का 'उपनिवेशवाद : अर्थव्यवस्था, राज्य और समाज' विषय पर युवा शोधार्थी कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। इस अन्‍तर्अनुशासनिक कार्यक्रम का उद्देश्य औपनिवेशिक शासन के तहत् 19वीं सदी के पूर्वाद्ध से स्‍वतंत्रता प्राप्‍त होने तक भारतीयों के सामाजिक-आर्थिक विषय पर कार्य कर रहे शोधकर्ताओं को एक मंच प्रदान करना है। यहां वे अपने शोध निष्कर्षों को साझा कर इस पर प्रख्‍यात विद्वानों से विचार विमर्श कर सकते है । आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज के इतिहास में रूचि रखने वाले विद्वानों से आवेदन पत्र आमंत्रित किया जाता है। डॉक्टरल उम्‍मीदवार ही इसके पात्र होंगे।

संकल्पना

भारत की अर्थव्यवस्था एवं समाज पर उपनिवेशवाद का असर बहुतायात है। 19वीं शताब्दी में ब्रिटेन ने जब भारत की अर्थव्यवस्था को अपने औद्योगिक विकास के लिए उपनगर (पेरिफेरी) के रूप में तबदील किया तो उनकी रूचि औपनिवेशिक व्यापारिक अधिशेष से हटकर कृषि से अर्जित आय अधिशेष पर केन्द्रित हो गई जिससे संरचनात्मक तौर पर 19वीं शताब्दी से ही भारत की अर्थव्यवस्था और समाज में भी परिवर्तन होने लगा। उस समय अलग-अलग प्रांतों (प्रेसिडेंसियों) में भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था भिन्न भू-राजस्व शासन के अधीन एकीकृत थी। इस परिवर्तनशील भिन्न औपनिवेशिक नीति ने ब्रिटिश विद्वानों और शासकों को भू-स्वामित्व की प्रकृति और विविध सामाजिक समूहों को परिभाषित करने पर मजबूर किया। बसने की प्रक्रिया (सेटलमेंट पैटर्न) विशेषकर भारतीय गांव, मुख्य मुद्दा बन गया। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विभिन्न राजनैतिक दबावों के परिणामस्वरूप राज्य निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। अर्थव्यवस्था में परिवर्तन और सांस्थानिक सरकारी कार्रवाइयों के कारण देशभर में सामाजिक सांस्कृतिक परिवर्तन प्रारंभ हो गए। राष्ट्रीय आंदोलन नें विभिन्न राजनैतिक प्रक्रियाओं को तथा अर्थव्यवस्था से जुड़ी मांगों को एक विशाल राष्ट्रीय मंच पर एकरूपता प्रदान की जिससे 20वीं शताब्दी के मध्य में एक जीवंत लोकतांत्रिक जन अभिव्यक्ति की संभावना बन गई। आज भारत क्रय शक्ति समता (परचेजिंग पॉवर पेरिटी) के रूप में विश्व का तीसरा सबसे बड़े अर्थतंत्र वाला देश है। तदनुसार उस समय के प्रचलित सामाजिक रूढ़ियों में भी सूक्ष्म परिवर्तन होने लगे। हाल ही में भारत ने यह साबित कर दिखाया है कि वित्तीय सेक्टर में वह पारदर्शिता और उत्तरदायित्व जैसे परिवर्तनों को मूर्त करने की राजनैतिक क्षमता रखता है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह नई चुनौतियों से निपटने के लिए, सुधार कार्यक्रमों और नीतियों के माध्यम से और अधिक सामाजिक हस्तक्षेप करेगी।


प्रस्तावित युवा शोधार्थी कार्यक्रम, निम्‍न छह विषयों पर केन्द्रित होगी :-
1. सामाजिक परिवर्तन
2. आर्थिक परिवर्तन
3. सांस्कृतिक रूपांतरण
4. कानून और उपनिवेशवाद
5. लिंग एवं उपनिवेशिता
6. स्‍थानीय स्‍व-शासन/ग्रामीण विकास : नीति, योजना तथा कार्यान्वयन
इस एक सप्‍ताह के आवासीय कार्यक्रम में भारत के विविध विश्वविद्यालयों/शोध संस्थानों से 15-20 युवा शोधार्थी जो इस क्षेत्र में गहन अध्ययन कर रहे है, भाग लेगें। जो इसमें भाग लेने के इच्छुक हैं उन्हें 1000-1200 शब्दों में एक संक्षिप्त लेख जमा कराना होगा। इसमें प्रतिदिन चार शोधार्थी अपने-अपने पर्चे प्रस्तुत करेंगे और विषय विशेषज्ञ इसमें सहयोग देते हुए इसकी समीक्षा करेंगे। इस कार्यशाला में व्‍याख्‍यान एवं समूह चर्चा सम्मिलित है। दिल्ली से बाहर से आए शोधार्थियों के लिए एन.एम.एम.एल. द्वारा III ए.सी. किराए की प्रतिपूर्ति (केवल सामान्‍य प्रभार) और रिहाईश की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा प्रतिभागियों को कार्यशाला की अवधि पूरा करने के उपरांत 5,000/- का मानदेय भी दिया जाएगा ।

कार्यक्रम की कार्रवाई को संपादित खंड के रूप में अथवा ऑकेजनल पेपर की श्रृंखला में चयनित पर्चां को प्रकाशित करने पर विचार किया जा सकता है।
कार्यक्रम की तारीख - 12-16 जून, 2017
कार्यक्रम स्थल - संगोष्ठी कक्ष, पुस्तकालय भवन
नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय
नई दिल्ली-110011
सारगर्भित लेख जमा करने की तिथि 21 अप्रैल, 2017 (1000-1200 शब्दों में) नवीनतम जीवनवृत्त सहित, सायं 5.30 बजे
निर्धारित तिथि के पश्चात् प्राप्त लेख स्वीकार नहीं किए जाएंगे । लेख केवल ई-मेल nmmlyoungresearchersworkshop@gmail.com पर ही भेंजे ।
चयनित पत्रों की संस्था की वेबसाईट पर घोषणा : 5 मई, 2017

एनएमएमएल युवा शोधकर्ता कार्यशाला के लिए चयनित उम्मीदवार (जून 2017) (76 KB)PDF file that opens in new window. To know how to open PDF file refer Help section located at bottom of the site.

चयनित उम्मींदारों को ई-मेल से सूचना : 8 मई, 2017

पूर्ण पर्चा (5000 शब्दों ) में प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि : 5 जून, 2017

इस संबंध में ई-मेल से संपर्क करें : nmmlyoungresearchersworkshop@gmail.com
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